गाँव मंच डेस्क, जयपुर, 5 सितंबर 2026। राजस्थान विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग ने व्याख्यान आयोजित किया। यह आयोजन प्रो. एन.के. सिद्धी की स्मृति में हुआ। कार्यक्रम शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया। व्याख्यान का विषय समकालीन भारत के सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित था।
भारतीय संदर्भों में समाजशास्त्रीय चिंतन की जरूरत
- कार्यक्रम में भारतीय समाज और सामाजिक बदलाव पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने समाजशास्त्रीय सोच को मजबूत करने पर जोर दिया।
- विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका राव ने स्वागत संबोधन दिया। उन्होंने विभाग की अकादमिक परंपरा का उल्लेख किया।
- डॉ. राव ने समाजशास्त्र की भूमिका को नए नजरिए से समझाया। उन्होंने बदलाव को समझने की जरूरत बताई।
- उनके अनुसार समाजशास्त्र केवल बदलाव जानने तक सीमित नहीं है।
- इसका उद्देश्य बदलाव से बन रहे समाज को समझना है।

AI के दौर में समाजशास्त्र की नई भूमिका
- डॉ. मोनिका राव ने AI का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि AI हर सवाल का अंतिम उत्तर नहीं है।
- इसलिए AI के उत्तरों पर सवाल उठाना जरूरी है। यह क्षमता समाजशास्त्रीय चिंतन को मजबूत करती है।
- उन्होंने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने शिक्षक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
- शिक्षक विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित करते हैं।

भारतीय समाज को समझने पर जोर
कार्यक्रम संयोजक डॉ. रोहित कुमार जैन ने आयोजन की जानकारी दी। उन्होंने इसकी निरंतर परंपरा का उल्लेख किया। यह व्याख्यान वर्ष 2003 से आयोजित हो रहा है। उन्होंने प्रो. एन.के. सिद्धी के योगदान को याद किया। उनके अनुसार सिद्धी ने भारतीय समाज को समझने पर जोर दिया। उन्होंने सिद्धांत और अनुभवजन्य अनुसंधान को जोड़ा। उन्होंने भारतीय गुरु-परंपरा का भी उल्लेख किया।


Edited by- Krishika Agarwal


