गांव मंच जयपुर, डेस्क 17 अप्रैल | चीकू की खेती कैसे की सही जानकारी आज किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। पारंपरिक फसलों के साथ अब किसान बागवानी की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में चीकू की खेती कम लागत में स्थिर आय का अच्छा विकल्प बन रही है।
फलदार बागवानी, खासकर चीकू की खेती, ऐसे किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन रही है जो कम जोखिम में स्थिर आमदनी चाहते हैं।
एक बार पौधे अच्छी तरह स्थापित हो जाएं तो यह फसल लंबे समय तक लगातार उत्पादन देती रहती है।
खेती में बदलते रुझानों के बीच अब किसान सिर्फ अनाज तक सीमित नहीं रहना चाहते।
रोपाई का सही समय कब होता है
चीकू के पौधे लगाने के लिए सबसे उपयुक्त समय बारिश की शुरुआत मानी जाती है। जून से अगस्त के बीच की अवधि में मिट्टी में पर्याप्त नमी रहती है, जिससे पौधों की जड़ें तेजी से विकसित होती हैं।
जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वहां किसान बसंत ऋतु यानी फरवरी–मार्च में भी पौध लगा सकते हैं।

किस प्रकार की जमीन में करें खेती
- चीकू ज्यादा संवेदनशील फसल नहीं है, लेकिन सही जमीन मिलने पर इसका उत्पादन बेहतर होता है।
- हल्की दोमट या काली मिट्टी इस फसल के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
- खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे जड़ों को नुकसान हो सकता है।
- तापमान 20 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने पर पौधे अच्छी तरह विकसित होते हैं।
बेहतर किस्म का चुनाव कैसे करें
- फसल की सफलता काफी हद तक चुनी गई किस्म पर निर्भर करती है।
- कालीपत्ती किस्म को किसान सबसे ज्यादा प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि इसका स्वाद और बाजार में मांग दोनों अच्छी रहती है।
- इसके अलावा क्रिकेट बॉल और PKM-1 जैसी किस्में भी बेहतर उत्पादन देती हैं और अलग-अलग बाजारों में पसंद की जाती हैं।
पौध लगाने की प्रक्रिया क्या हो
रोपाई से पहले खेत की अच्छी तैयारी जरूरी होती है। आमतौर पर एक मीटर गहरा और चौड़ा गड्ढा खोदकर उसमें गोबर की खाद मिलाई जाती है, जिससे पौध को शुरुआती पोषण मिलता है।
पौधों के बीच 8 से 10 मीटर की दूरी रखना जरूरी है ताकि पेड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके। कुछ किसान आधुनिक तकनीकों के तहत सघन रोपण (हाई डेंसिटी) भी अपना रहे हैं।
देखभाल और सिंचाई का तरीका
- शुरुआती 2–3 वर्षों में पौधों की देखभाल पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है।
- गर्मियों में नियमित अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए, जबकि ठंड के मौसम में पानी की जरूरत कम हो जाती है।
- जैविक खाद का उपयोग करने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और फलों की गुणवत्ता भी सुधरती है।
कीट और रोग नियंत्रण कैसे करें
- चीकू के बगीचों में कुछ कीट पत्तियों और फलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
- समय-समय पर निगरानी रखना और जरूरत पड़ने पर दवा का छिड़काव करना जरूरी है।
- बगीचे की साफ-सफाई बनाए रखने और गिरे हुए फलों को हटाने से भी रोगों का खतरा कम किया जा सकता है।
उत्पादन और आमदनी का अनुमान
- चीकू का पौधा आमतौर पर 3 से 4 साल बाद फल देना शुरू करता है, लेकिन इसके बाद कई वर्षों तक नियमित उत्पादन मिलता रहता है।
- एक पेड़ से अच्छा उत्पादन मिलने पर किसान को लगातार आय मिलती है।
- बाजार में इसकी कीमत स्थिर रहने के कारण यह फसल आर्थिक रूप से लाभकारी साबित होती है।
“एग्रीकल्चर डेटा और गाइड के लिए Indian Council of Agricultural Research की वेबसाइट उपयोगी है ।”
“आम की खेती और बागवानी से जुड़ी जानकारी के लिए Ministry of Agriculture and Farmers Welfare की वेबसाइट देखें ।”
अगर किसान चीकू की खेती कैसे करें यह सही तरीके से समझ लें, तो वे लंबे समय तक स्थिर आय कमा सकते हैं।
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– Manisha Bhambhu , Journalist


