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India Heatwave 44C April: बढ़ती गर्मी और खतरनाक संकेत

गांव मंच कर्नाटक , डेस्क 17 अप्रैल | India Heatwave 44C April का असर अब देशभर में साफ दिखाई दे रहा है। अप्रैल के मध्य में ही तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है, जिससे हीटवेव की स्थिति गंभीर हो गई है।

ndia में गर्मी हर साल पहले से ज़्यादा इंटेंस होती जा रही है और हेत्वावेस अब नार्मल बन चुकी है। अप्रैल के मिड में ही टेम्परेचर एक्सट्रीम लेवल्स तक पहुँच रहा है।
कर्णाटक के कलबुर्गी के पास औराद गाओं में 15 april को टेम्परेचर 44°C रिकॉर्ड हुआ।

ये उस दिन इंडिया का हाईएस्ट टेम्परेचर रहा , जिसने हेत्वावे सिचुएशन को सीरियस बना दिया। इस एक्सट्रीम हीट के चलते फार्मर्स गले पर गीला कपडा लपेट कर नज़र आये। बच्चे घर के अंदर रहे और नार्थ कर्नाटक के कुछ डिस्ट्रिक्ट में येलो अलर्ट इशू किया गया।

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Temperature Rise का ट्रेंड अब क्लियर हो चूका है।

  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक india का मैं सरफेस टेम्परेचर 1901 के बाद से स्टडिल्य इनक्रीस हो रहा है। Annual Temperature लगभग 0.3°C पैर सेंचुरी बढ़ा है , जो लॉन्ग टर्म वार्निंग है।
  • Post – monsoon और विंटर सीजन में वार्निंग और फ़ास्ट हो रही है , जिसका डायरेक्ट इम्पैक्ट समर स्टार्ट होने पर पढता है। ज़मीन ठंडा नहीं हो पता और April – May में हीट क्विकली बिल्ड हो जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार India Heatwave 44C April जैसी स्थिति अब हर साल देखने को मिल सकती है, जिससे खतरा लगातार बढ़ रहा है।

Heatwaves Frequency बढ़ रही , रिस्क और ज़्यादा हो गया !

  • Reports के अकॉर्डिंग 2011 से 2020 का डिकेड सबसे गरम रिकॉर्ड हुआ है। 1951 के बाद हेत्वावेस की फ्रीक्वेंसी और दरशन दोनों में नोटिसबले इनक्रीस देखा गया है।
  • Northwestern, central और नॉर्थईस्टर्न रेगिओंस में हेत्वावेस का इफ़ेक्ट ज़्यादा सीवियर होता जा रहा है। Hotter नाइट्स भी मेजर प्रॉब्लम बन चुकी हैं , क्युकी बॉडी को रिकवरी का टाइम नहीं मिलता।

Forest Loss ने Natural Cooling System को वीक कर दिया।

  • India में पहले फारेस्ट कवर अराउंड 40 % मन जाता था।, जो अब 22 % तक गिर चूका है। Dense canopy फारेस्ट सिर्फ 3% बचा है , जो अलार्मिंग सिचुएशन क्रिएट करता है।
  • फारेस्ट shade , मॉइस्चर और कार्बन अब्सॉर्प्शन का काम करते है , इसलिए उनका लोस्स टेम्परेचर को और इनक्रीस करता है। मैंग्रोवेस भी इंडिपेंडेंस के बाद से 40% तक रेडके हो चूका है।

Experts Solution पर फोकस करने की सलाह दे रहे है !

  • पेड़ लगाना, कूल रूफ्स और हीट एक्शन प्लान जैसे कदम तापमान के प्रभाव को कम कर सकते हैं। अहमदाबाद का हीट एक्शन प्लान इसका उदाहरण है, जहां गर्मी से होने वाली मौतों को कम करने में सफलता मिली है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि उत्सर्जन पर नियंत्रण और शहरी योजना में सुधार करके भारत भविष्य में हीटवेव से बेहतर तरीके से मुकाबला कर सकता है। अगर समय रहते सही कदम उठाए गए, तो अत्यधिक गर्मी वाले मौसम को भी संभालने योग्य बनाया जा सकता ह।

“पर्यावरण संरक्षण की जानकारी के लिए United Nations Environment Programme उपयोगी है</a>।”

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-Vishakha Mehra , Journalist

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