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ज़हर निगल रही मिट्टी, संकट में खेती, 1 जून से शुरू होगा मिशन खेत बचाओ

हिना शर्मा। गांव मंच डेस्क, नई दिल्ली। भारत के कई हिस्सों में अन्नदाता के खेत अब आखिरी सांसें गिन रहे हैं। हरित क्रांति के बाद दशकों तक यूरिया, डीएपी और जहरीले कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल ने मिट्टी की जान निकाल दी है। जो धरती कभी सोना उगलती थी, वो अब बंजर होकर बीमारी दे रही है।

1 जून से पूरे देश में मिशन खेत बचाओ अभियान

अब बेजान हो चुकी मिट्टी को बचाने के लिए कृषि मंत्रालय 1 जून से पूरे देश में ‘मिशन खेत बचाओ’ अभियान शुरू कर रहा है। ICAR और ICMR भी ‘वन हेल्थ’ कॉन्सेप्ट पर मिलकर काम करेंगे, जिसमें मिट्टी, पशु और इंसान की सेहत को एक साथ जोड़ा जाएगा।

पंजाब हरियाणा में सबसे ज्यादा नुकसान

90 के दशक के बाद भी रिकॉर्ड पैदावार की अंधी होड़ जारी रही। सरकारों और नीति-निर्माताओं ने किसानों को यूरिया-डीएपी का ओवरडोज देने के लिए मजबूर किया। धरती का सीना चीरकर पानी निकाला गया। सब्सिडी के दम पर खाद कंपनियों की तिजोरियां भरी गईं, लेकिन मिट्टी की सेहत सुधारने वाली योजनाएं फाइलों में दफन हो गईं। नतीजा सबके सामने है पंजाब-हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्य आज ‘कैंसर बेल्ट’ बन चुके हैं। उपजाऊ जमीनें ऊसर और बंजर हो गईं। भूजल स्तर पाताल में पहुंच गया।

किसानों को माना दोषी

आज बड़ी चालाकी से इस बर्बादी का ठीकरा किसान के सिर फोड़ा जा रहा है। लेकिन हकीकत ये है कि नीतियां सरकार की थी, खाद-कीटनाशक के कोटे सरकार के थे, कंपनियों को सब्सिडी सरकार देती थी। किसान ने वही किया जो सरकारी तंत्र ने एमएसपी और सब्सिडी का लालच देकर सिखाया। जब जमीन और इंसान दोनों बीमार हो गए, तो किसान को खलनायक बनाना गलत है।

कृषि मंत्री बोले मुनाफा नहीं खेत की सेहत प्राथमिकता

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने माना कि पिछली सरकारों ने सिर्फ खाद कंपनियों का मुनाफा देखा, मिट्टी का नहीं। अरबों का जागरूकता बजट कागजों पर खर्च हुआ, लेकिन किसानों को यूरिया के नुकसान तक नहीं बताए गए। खेत बचाओ मिशन सिर्फ सरकारी इवेंट बनकर न रह जाए। इसके लिए खाद सब्सिडी को रासायनिक से हटाकर प्राकृतिक और जैविक खेती की तरफ मोड़ना होगा। 90 के बाद की नीतियां बनाने वालों की जवाबदेही तय करनी होगी।

किसान भाइयों के लिए सीधी बात

यूरिया के जहर ने खेत की ताकत खत्म कर दी है। जमीन अब बीज नहीं पकड़ रही। सरकार 1 जून से खेत बचाने निकली है ऐसे में अपने खेत की मिट्टी की सेहत जांच कर पैदावार बढ़ाने के इस प्रयास में किसान भाई भी भागीदार बनें।

क्या है मिशन खेत बचाओ

“स्वस्थ मिट्टी, समृद्ध किसान, सुरक्षित भविष्य”

  1. अभियान का उद्देश्य

मिट्टी की घटती उर्वरता के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देना।
जैविक एवं प्राकृतिक खेती के विकल्पों की जानकारी देना।
किसानों को मृदा परीक्षण और वैज्ञानिक खेती के लिए प्रेरित करना।
जल संरक्षण और भूमि संरक्षण के उपायों का प्रसार करना।

  1. प्रमुख संदेश

मिट्टी भी जीवित है, इसकी सेहत का ध्यान रखें।
मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी।
आज की सावधानी, कल की समृद्धि।
खेत नहीं बचेंगे तो भविष्य नहीं बचेगा।

  1. अभियान की गतिविधियां

चरण 1 जागरूकता
गांव-गांव जनसंवाद
किसान चौपाल
स्कूल एवं कॉलेज जागरूकता कार्यक्रम
सोशल मीडिया एवं डिजिटल अभियान

चरण 2 परीक्षण और परामर्श
निःशुल्क या रियायती मृदा परीक्षण शिविर
मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड की जानकारी
कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन सत्र

चरण 3 व्यवहार परिवर्तन
जैविक खाद निर्माण प्रशिक्षण
वर्मी कम्पोस्ट इकाइयों का प्रदर्शन
संतुलित उर्वरक उपयोग पर कार्यशालाएं
सफल किसानों के मॉडल खेतों का भ्रमण

  1. अभियान के मुख्य मुद्दे

मिट्टी में कार्बन की कमी
भूजल स्तर में गिरावट
अंधाधुंध रासायनिक उपयोग
भूमि की घटती उत्पादकता
कृषि लागत में वृद्धि

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