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राजस्थानी लेखिका संस्थान का साहित्यिक सम्मेलन सम्पन्न, ‘घर कीं कैवणों चावै’ और ‘रेत नै बणा आरसी’ पुस्तकों का हुआ लोकार्पण

गांव मंच डेस्क, जयपुर।

  • राजस्थानी लेखिका संस्थान द्वारा आयोजित साहित्यिक सम्मेलन शनिवार को जयपुर स्थित
  • राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति के सभागार में गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।
  • साहित्य, संस्कृति और सृजन को समर्पित इस आयोजन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए साहित्यकारों, युवा रचनाकारों
  • और साहित्य प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सम्मेलन में राजस्थानी भाषा के संरक्षण,
  • महिला लेखन को प्रोत्साहन और नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।

जयपुर में आयोजित राजस्थानी लेखिका संस्थान के साहित्यिक सम्मेलन में ‘घर कीं कैवणों चावै’ और ‘रेत नै बणा आरसी’ पुस्तकों का लोकार्पण।

‘घर कीं कैवणों चावै’ और ‘रेत नै बणा आरसी’ पुस्तकों का लोकार्पण

  • सम्मेलन के दौरान वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. घनश्याम नाथौ कच्छावा ने डॉ. शारदा कृष्ण की पुस्तक
  • ‘घर कीं कैवणों चावै’ तथा जीनस कंवर की पुस्तक ‘रेत नै बणा आरसी’ का लोकार्पण किया।
  • इस अवसर पर मनीषा आर्य सोनी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
  • पुस्तकों पर सुनीता बिश्नोलिया एवं डॉ. दर्शना कंवर ‘उत्कर्ष’ ने समीक्षात्मक वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए
  • दोनों कृतियों की साहित्यिक विशेषताओं और राजस्थानी भाषा में उनके योगदान पर प्रकाश डाला।
  • इस सत्र का संचालन भगवती पारीक ‘मनु’ ने किया।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ सम्मेलन का शुभारंभ

  • कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
  • उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं गीतकार सत्यदेव संवितेन्द्र ने की,
  • जबकि दिनेश कुमार जांगिड़ ‘सारंग’ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
  • संस्थान की अध्यक्ष डॉ. शारदा कृष्ण ने संस्था की गतिविधियों और उद्देश्यों से सभी को अवगत कराया।
  • वहीं राजवीर सिंह चळकोई ने अपने बीज-भाषण में मायड़ भाषा की मान्यता,
  • साहित्य की सामाजिक भूमिका और राजस्थानी भाषा को रोजगार से जोड़ने की आवश्यकता पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।

राजस्थानी भाषा के संरक्षण पर वक्ताओं का जोर

  • वरिष्ठ साहित्यकार सत्यदेव संवितेन्द्र ने अपने संबोधन में कहा कि
  • “राजस्थानी भाषा जीवित रहेगी तो राजस्थान की सभ्यता, संस्कृति और लोक परंपराएं भी सुरक्षित रहेंगी।”
  • उन्होंने नई पीढ़ी को मातृभाषा से जोड़ने और साहित्यिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर बल दिया।

युवा कवियों ने बांधा समां

  • सम्मेलन के अंतर्गत आयोजित ‘राजस्थानी युवा कविताई रा सुर’ सत्र में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए
  • युवा कवियों अक्षिता, अनीता सैनी, अवंतिका, जेठानंद पंवार, कपिला पालीवाल,
  • गजराज कंवर, मीनाक्षी पारीक, सपना वर्मा, कृष् गौड़ और विप्लव व्यास ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं की खूब सराहना प्राप्त की।
  • इस सत्र का संचालन कामना राजावत ने किया।

महिला लेखन और नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने पर विशेष फोकस

सम्मेलन में उपस्थित सभी वक्ताओं ने राजस्थानी भाषा के संरक्षण, महिला लेखन की सशक्त भूमिका और नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में प्रमोद शर्मा, सतीश शर्मा, अंशु व्यास, पवन, गंगाबिशन बिश्नोई, गौरीशंकर निमीवाल एवं लोकेश कुमार साहिल सहित अनेक साहित्यकार और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

राजस्थानी लेखिका संस्थान का यह सम्मेलन साहित्य, संस्कृति और मातृभाषा के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ, जिसने युवा और वरिष्ठ रचनाकारों को एक साझा मंच प्रदान किया।

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https://artandculture.rajasthan.gov.in

Edited by – Riddhima

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