गांव मंच डेस्क जयपुर, 14 अप्रैल | भारत में गन्ने की खेती फार्मर्स के लिए एक इम्पोर्टेन्ट इनकम सोर्स है , लेकिन छोटी मिस्टेक्स से पूरी फसल का नुकसान हो सकता है।
एक्सपर्ट्स कहते है की अगर सही वक़्त पर मॉनिटरिंग और मैनेजमेंट न किया जाए। , तो प्रोडक्शन और प्रॉफिट दोनों पर डायरेक्ट इम्पैक्ट पढता है। इसलिए फार्मर्स को प्लांटिंग के बाद से ही क्रॉप पर रेगुलर नज़र रखनी चाहिए , ताकि रिस्क अर्ली स्टेज पर कण्ट्रोल हो जाए।
शूट बोरर का अटैक सबसे पहले बड़ा डेंजर बन सकता है।
गन्ने के क्रॉप में शूट बोरर एक डेंजरस पेस्ट मन जाता भाई , जो प्लांट के अंदर घुसकर ग्रोथ को स्लो कर देता है इसके सिम्टम्स में तना खोखला होना , पत्तों का पीला पड़ना और प्लांटके का सुखना शामिल होता है , जो सीरियस वार्निंग सिग्न है। अगर फार्मर टाइम पर अफेक्टेड प्लांट्स को रिमूव नहीं करता , तो इन्फ़ेस्ततिओं फ़ास्ट स्प्रेड होती है और पूरे फील्ड को डैमेज कर सकती है। इसलिए अर्ली स्टेज पर पेस्ट कण्ट्रोल मेझस और आर्गेनिक मेथड्स अडॉप्ट करना यील्ड बचने के लिए काफी ज़रूरी होता है।

वीक ग्रोथ वाले प्लांट्स को इग्नोर करना महंगा पढ़ सकता है !
- कई बार फार्मर्स पतले और स्लो ग्रोथ वाले पौधों को नार्मल समझकर इग्नोर कर देते है, जो बाद में लोस्स का रीज़न बन जाता है।
- कमज़ोर पौधे क्रॉप की प्रोडक्टिविटी काम कर देते है और हार्वेस्टिंग के टाइम आउटपुट पर बड़ा इफ़ेक्ट डालते है।
- एक्सपर्ट्स सुग्गेस्टिव देते है की साइल नुट्रिएंट्स का बैलेंस मेन्टेन करें और गोबर खाद जैसे आर्गेनिक मनुरे का उसे बढ़ाएं। प्रॉपर स्पेसिंग , तिमली इरीगेशन और रेगुलर मॉनिटरिंग से क्रॉप हेल्थ इम्प्रूव हो सकती है।
यूरिया का अधिक उपयोग: फसल हरी दिखती है लेकिन कमजोर हो जाती है
- ज्यादा हरी-भरी फसल के चक्कर में कई किसान यूरिया का जरूरत से ज्यादा उपयोग कर देते हैं, जिससे लंबे समय में फसल कमजोर हो जाती है।
- पौधा बाहर से मजबूत दिखता है, लेकिन अंदर से नरम हो जाता है और रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है।
- विशेषज्ञों का कहना है कि एनपीके (NPK) का संतुलित उपयोग करें और उर्वरक को एक बार में देने के बजाय किस्तों में डालना बेहतर होता है।
- मिट्टी की जांच के आधार पर पोषक तत्वों की योजना बनाने से उत्पादन स्थिर रहता है और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है।
सही योजना से उत्पादन भी बढ़ेगा और मुनाफा भी
- खेत की नियमित जांच और कीटों को शुरुआती स्तर पर नियंत्रित करने से गन्ने की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
- संतुलित खाद और समय पर देखभाल से फसल स्वस्थ रहती है और बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि ये छोटी-छोटी सावधानियां किसानों को नुकसान से बचाकर बेहतर पैदावार दिलाने में मदद करती हैं।
“गन्ना खेती से जुड़ी सही जानकारी के लिए ICAR की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।”
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-Vishakha Mehra , Journalist


