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राजस्थान विधानसभा अमृत महोत्सव: ऐतिहासिक अधिनियमों से लोकतांत्रिक विरासत को नई मजबूती

गाँव मंच डेस्क, राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने पर राजस्थान विधानसभा अमृत महोत्सव का आयोजन किया गया। प्रथम सत्र में ऐतिहासिक कानूनों पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में लोकतांत्रिक परंपराओं और जनहितकारी विधानों का महत्व बताया गया। वक्ताओं ने संवैधानिक मूल्यों को मजबूत बनाने का आह्वान किया। यह आयोजन विधानसभा की गौरवशाली यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बना।

विधानसभा में सार्थक बहस को बताया लोकतंत्र की आत्मा

  • पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी ने स्वस्थ बहस का महत्व बताया।
  • उन्होंने कहा कि हर विधायक की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। प्रत्येक विधेयक पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
  • उन्होंने जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
  • साथ ही, राजस्थान विधानसभा सदस्य (निरर्हता निवारण) अधिनियम, 1969 और राजस्थान लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 की भूमिका भी स्पष्ट की।

भूमि सुधारों ने बदली किसानों की तस्वीर

  • पूर्व विधायक पंडित रामकिशन शर्मा ने सर्वोदय-भूदान आंदोलन का उल्लेख किया। उन्होंने इसे सामाजिक समरसता का मजबूत माध्यम बताया।
  • राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने भूमि सुधार कानूनों की चर्चा की।
  • उन्होंने कहा कि राजस्थान ने किसानों को भूमि स्वामित्व दिलाने में अग्रणी भूमिका निभाई। इससे कृषि विकास और खाद्यान्न उत्पादन को नई गति मिली।

पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन पर विशेष जोर

  • बूंदी विधायक हरिमोहन शर्मा ने राजस्थान सूचना का अधिकार अधिनियम, 2000 की चर्चा की।
  • उन्होंने इसे पारदर्शी शासन की दिशा में बड़ा कदम बताया।
  • पूर्व विधायक राजपाल सिंह शेखावत ने एफआरबीएम अधिनियम, 2005 का महत्व समझाया।

https://assembly.rajasthan.gov.in

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Edited by- Krishika Agarwal

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